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 पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - घर में प्रवेश करने और घर से निकलने की सुन्नत



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घर में प्रवेश करने और घर से निकलने की सुन्नत:


इस से संबंधित भी कुछ सुनतें हैं.
* इमाम नववी ने कहा है कि "बिस्मिल्लाहिर-रहमानिर-रहीम"(अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपाशील, अत्यंत दयावान है) पढ़ना मुस्तहब्ब यानी पसंदीदा है, और उस समय अल्लाह सर्वशक्तिमान को अधिक से अधिक याद करे और फिर सलाम करे. 

 


१- अल्लाह को याद करे: क्योंकि हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो- की हदीस में है: ( जब आदमी अपने घर में प्रवेश करता है, और प्रवेश करते समय और खाने के समय अल्लाह को याद करता है तो शैतान कहता है चलो चलो न तो तुम्हारे लिए यहाँ कोई रात गुज़ारने की जगह है और न रात का भोजन है.) इसे इमाम मुस्लिम ने उल्लेख किया है.

 


२  प्रवेश होने के समय की दुआ पढ़े– क्योंकि हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो- की हदीस में यह दुआ आई है.

( اللهم إني أسألك خير المولج وخير المخرج ، بسم الله ولجنا ، وبسم الله خرجنا ، وعلى الله ربنا توكلنا ، ثم يسلم على أهله )
अल्लाहुम्मा इन्नी असअलुका खैरल-मौलिज व खैरल-मखरिज, बिस्मिल्लाहि वलजना, व बिस्मिल्लाहि खरजना, व अलललाहि तवकक्लना. (हे अल्लाह! तुझ से मैं प्रवेश होने की भलाई और निकलने की भलाई मांगता हूँ, हम अल्लाह का नाम लेकर प्रवेश किये, और अल्लाह का नाम लेकर निकले, और अल्लाह हमारे पालनहार पर ही हमने भरोसा किया.) यह दुआ पढ़े और फिर सलाम करे. इसे इमाम अबू-दावूद ने उल्लेख किया है.

 


यदि घर में प्रवेश करते समय और घर से निकलते समय एक व्यक्ति इश्वर पर भरोसा को महसूस करेगा, तो सदा अल्लाह से संबंध बना रहे गा.

३- मिस्वाक का प्रयोग: हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो- जब अपने घर में प्रवेश करते थे तो मिस्वाक से ही शुरू करते थे.
 इसे इमाम मुस्लिम ने उल्लेख किया है.

४- सलाम करना: क्योंकि अल्लाह सर्वशक्तिमान ने कहा है:
( فَإِذَا دَخَلْتُمْ بُيُوتاً فَسَلِّمُوا عَلَى أَنْفُسِكُمْ تَحِيَّةً مِنْ عِنْدِ اللَّهِ مُبَارَكَةً طَيِّبَةً ) [النور:61]

 

अलबत्ता जब घरों में जाया करो तो अपने लोगों को सलाम किया करो, अभिवादन अल्लाह की ओर से नियत किया हुआ, बरकतवाला और अत्यधिक पाक. [अन-नूर: 61]
• और यदि हम मान लें कि एक मुसलमान व्यक्ति प्रत्येक फ़र्ज़ नमाज़ को मसजिद में अदा करता है और फिर घर में प्रवेश करता है तो रात-दिन में केवल घर में प्रवेश करने की सुन्नतों की संख्या जिन पर बार बार अमल होता है बीस हो जाती हैं.
• और घर से निकलते समय यह दुआ पढ़े:
( بسم الله ، توكلت على الله ، ولا حول ولا قوة إلا بالله )
!"बिस्मिल्लाहि, तवक्कलतु अलललाहि वला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह" (अल्लाह के नाम से, मैंने अल्लाह पर ही भरोसा किया, और न कोई शक्ति है और न कोई बल है मगर अल्लाह ही से.) यदि एक व्यक्ति यह दुआ पढ़ लेता है तो उसे(फरिश्तों की ओर से) कहा जाता है, तुम्हारे काम पूरे होगए, और तुम बचा लिए गए, तुम्हें मार्ग दे दिया गया, और शैतान उस से दूर हट जाता है.

 


इसे तिरमिज़ी और अबू-दाऊद ने उल्लेख किया है.
• ग़ौरतलब है कि एक मुसलमान दिन-रात में कई बार अपने घर से बाहर निकलता है: मस्जिद में नमाज़ के लिए बाहर निकलता है, और अपने काम के लिए घर से बाहर निकलता है, घर के कामों केलिए बाहर निकलता है, यदि एक व्यक्ति जब जब भी अपने घर से निकलता है, और इस सुन्नत पर अमल करता है तो बहुत बड़ा पुण्य और बहुत बड़ी भलाई प्राप्त कर सकता है.

 


* घर से बाहर  निकलते समय की इस सुन्नत पर अमल करने के परिणाम:
१: इस के द्वारा एक आदमी सभी महत्वपूर्ण सांसारिक और आखिरत से संबंधित मामलों में बेफिक्र हो जाता है.
२: इसी तरह आदमी हर प्रकार की बुराई और हानि, चाहे भूतप्रेत की ओर हो या मानवता की ओर से, सब से बच जाता है.

 


३:यह पढ़ने वाले व्यक्ति को मार्ग मिल जाता है:और रास्ता भटकने से बच जाता है, और अल्लाह सर्वशक्तिमान आपको आपके सभी धार्मिक और सांसारिक कामों में सही रास्ता दिखाता जाता है.






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